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जन्मदिन की खुशी मातम में बदली:गोवा हादसे में पिता की मौत; बेटी बोली-एक पल में उजड़ गया हमारा पूरा परिवार

23 फरवरी को अपना जन्मदिन मनाने गोवा पहुंची रुचिका शर्मा के लिए यह तारीख अब हमेशा के लिए दर्द बन गई है। जन्मदिन से ठीक पहले हुए सड़क हादसे में उनके पिता भगतराम शर्मा की मौत हो गई, मां लीला शर्मा गंभीर रूप से घायल हैं और तीन महीने की बच्ची भी चोटिल हैं। रुचिका की आवाज अब भी कांप जाती है, जब वह उस शाम को याद करती हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए रुचिका शर्मा ने कहा कि सोमवार शाम करीब 4:30 बजे तेज रफ्तार थार चालक ने हमारी कार में टक्कर मार दी। जिसके बाद मैंने सबसे पहले अपनी तीन महीने की बेटी को चेक किया, फिर मम्मी को देखा। वह आंखें खोले थीं, लेकिन कोई मूवमेंट नहीं था। मुझे लगा कि मैं ही मर गई हूं। पापा को जब देखा तो उनकी जुबान उलट गई थी, दांत टूट गए थे और बहुत खून बह रहा था। मैं समझ ही नहीं पा रही थी कि क्या करूं…। बता दें कि भगतराम शर्मा का शव गुरुवार को भोपाल लाया गया, जबकि उनकी पत्नी लीला शर्मा की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें एंबुलेंस से भोपाल लाया जा रहा है। मदद के बजाय वीडियो बनाता रहा थार चालक रुचिका का आरोप है कि जिस युवक शौर्य गोयल ने टक्कर मारी, वह हादसे के बाद मदद करने के बजाय वीडियो बना रहा था। एक व्यक्ति जिसने इतना बड़ा एक्सीडेंट किया, वह उतरकर वीडियो कैसे बना सकता है? वह मेरे पापा का वीडियो बना रहा था। उसने एंबुलेंस को कॉल नहीं किया, बल्कि अपने पिता को कॉल किया। क्या इतनी भी संवेदनशीलता नहीं होती? रुचिका का कहना है कि यदि उस समय सच्चा पछतावा दिखता, एक बार ‘सॉरी’ कहा जाता, तो शायद उनका नजरिया अलग होता। अगर उसने एक बार मेरी मां से माफी मांगी होती, तो मैं सोचती कि बच्चा है, गलती हो गई। लेकिन उसने पलटकर देखा तक नहीं। दामाद बोले- हार्ट अटैक नहीं, गर्दन टूटी थी परिवार इस बात से भी आहत है कि हादसे के बाद कुछ बयानों में ‘हार्ट अटैक’ का जिक्र किया गया। परिवार के दामाद तुषार ने कहा, “पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ लिखा है कि उनकी गर्दन (नेक) टूट गई थी, रिब्स में गंभीर चोट थी, इंटरनल ब्लीडिंग थी। डॉक्टरों ने कहा कि ऐसी हालत में बचाना लगभग असंभव था। फिर हार्ट अटैक की बात क्यों कही गई? ‘यह सिर्फ सड़क हादसा नहीं, पूरा परिवार टूट गया’ तुषार की आवाज भर्रा जाती है, जब वह मॉर्चरी का जिक्र करते हैं। वो कहते हैं कि ट्रॉमा वो होता है, जब आप अपने ससुर की बॉडी को मॉर्चरी में देखते हैं। चारों तरफ लाशें पड़ी हों, आप अपनी पत्नी को संभाल रहे हों, मां स्ट्रेचर पर बेडरिडन हों, तीन महीने की बच्ची गोद में हो और आप खुद पुलिस स्टेशन के चक्कर काट रहे हों। तुषार का कहना है कि यह केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे परिवार के टूट जाने की कहानी है। मां की पेल्विस, रिब्स और शोल्डर में फ्रैक्चर रुचिका कहती हैं कि उनकी मां की पेल्विस बोन, रिब्स और शोल्डर में फ्रैक्चर है। वे हिल भी नहीं पा रही हैं। एयरलिफ्ट संभव नहीं है, एंबुलेंस से लाने में 30-40 घंटे लग रहे हैं। कोई कह रहा है माइनर इंजरी, क्या पेल्विस बोन टूटना माइनर है? क्या स्ट्रेचर पर पड़े रहना माइनर है? क्या एक परिवार का खत्म हो जाना माइनर है? हमने शौर्य को गाड़ी से उतरते देखा तुषार का कहना है कि घटना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरे से पूरी सच्चाई सामने आ सकती है। हमने शौर्य को गाड़ी से उतरते देखा, लेकिन सच क्या है, यह सीसीटीवी फुटेज से साफ हो जाएगा। हम बस चाहते हैं कि सच सामने आए। सजा मिले, ताकि कोई और परिवार न टूटे। जन्मदिन बना जिंदगी का सबसे दर्दनाक दिन रुचिका कहती हैं कि हमें बदला नहीं चाहिए, हमें न्याय चाहिए। ताकि कोई और बेटी अपने पिता को इस तरह न खोए। कोई और तीन महीने की बच्ची अपनी नानी को स्ट्रेचर पर न देखे। 26 फरवरी, जो एक जन्मदिन होना था, अब एक ऐसा दिन है, जिसे यह परिवार कभी मना नहीं पाएगा। पुलिस ने कहा- लड़का ही चला रहा था गाड़ी गोवा के अजुना थाने के सब-इंस्पेक्टर साईं किनलेकर ने दैनिक भास्कर को बताया कि लड़की के गाड़ी चलाने की बात अफवाह है। जांच में आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए हैं। फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि गाड़ी एक युवक चला रहा था। उसका नाम शौर्य है और वह दिल्ली का रहने वाला है। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल उसकी जमानत हो गई है। पुलिस ने यह भी बताया कि दोनों वाहन रेंट-ए-कैब थे और घटना के बाद विधिवत पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई है। एडवोकेट बोले- फिलहाल पुरानी व्यवस्था के तहत मिलती है जमानत इस मामले में एडवोकेट अरुण सिंह राणा का कहना है कि सड़क दुर्घटना से जुड़े अधिकतर मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए (लापरवाही से मौत) लगाई जाती है, जो वर्तमान में जमानती अपराध की श्रेणी में आती है। उन्होंने बताया कि 2023 में प्रस्तावित नए आपराधिक कानून में इस प्रावधान को सख्त करने और गैर-जमानती बनाने की बात कही गई थी, लेकिन विरोध के बाद इसे तत्काल प्रभाव से लागू नहीं किया गया। राणा के अनुसार, यह व्यवस्था पूरे देश में समान रूप से लागू है और जब तक कानून में औपचारिक संशोधन प्रभावी नहीं होता, तब तक ऐसे मामलों में जल्दी जमानत मिलना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा माना जाएगा। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… गोवा में भोपाल के परिवार काे थार ने मारी टक्कर मृतक की पहचान भगत राम शर्मा के रूप में हुई है, जो भोपाल के होशंगाबाद रोड स्थित सिग्नेचर S9 में रहते थे। हादसा सोमवार शाम करीब 4:30 बजे हुआ। टक्कर इतनी तेज थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। भगत राम शर्मा को सिर में गंभीर चोटें आईं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पढ़ें पूरी खबर

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