होली की शाम इस बार आसमान में भी रंग बिखरेंगे। 3 मार्च, मंगलवार को पूर्णिमा पर पूर्ण चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना घटित होगी। भारत में यह ग्रहण ग्रस्तोदय के रूप में दिखाई देगा, यानी चंद्रोदय के समय ही चंद्रमा पर ग्रहण लगा हुआ रहेगा। हालांकि यहां पूर्ण नहीं, बल्कि आंशिक चंद्रग्रहण ही कुछ मिनटों के लिए देखा जा सकेगा। विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के अनुसार, चंद्रमा पृथ्वी की पूर्ण छाया से होकर गुजरेगा। इस दौरान पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की नीली रोशनी को बिखेर देता है और केवल लाल प्रकाश चंद्रमा तक पहुंचता है। इसी कारण पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा तांबे या गहरे लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है। दोपहर में शुरू, शाम को दिखेगा असर खगोलीय गणना के अनुसार आंशिक ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट 07 सेकंड से आरंभ होगा। पूर्णग्रहण 4 बजकर 34 मिनट 34 सेकंड पर शुरू होकर 5 बजकर 32 मिनट 49 सेकंड पर समाप्त हो जाएगा। आंशिक ग्रहण की समाप्ति शाम 6 बजकर 47 मिनट 15 सेकंड पर होगी। चूंकि भारत में चंद्रोदय शाम को होगा, इसलिए यहां केवल अंतिम आंशिक चरण ही दिखाई देगा। जिन जिलों में चंद्रोदय पहले होगा, वहां ग्रहण अधिक देर तक दिखेगा, जबकि पश्चिमी जिलों में अवधि कम रहेगी। 58 मिनट का पूर्णग्रहण, भारत में दिखेगा अंतिम चरण पूर्णग्रहण की कुल अवधि 58 मिनट रहेगी, लेकिन भारत में चंद्रोदय के समय तक इसका अधिकांश भाग बीत चुका होगा। प्रदेश में पूर्वी जिलों में ग्रहण लगभग 40 से 45 मिनट तक दिख सकता है, जबकि पश्चिमी जिलों में यह अवधि घटकर करीब 10 मिनट के आसपास रह जाएगी। सारिका घारू के अनुसार, चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है। इसके लिए किसी विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं होती। ये खबर भी पढ़ें… फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण:2007 और 1979 के बाद फिर बना संयोग फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा यानी होली पर इस बार चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार इससे पहले 3 मार्च 2007 और 13 मार्च 1979 को होली पर चंद्र ग्रहण लगा था। अब 3 मार्च 2026 को एक बार फिर होली की पूर्णिमा पर ग्रहण पड़ रहा है। इसके बाद 25 मार्च 2043 को होली पर ग्रस्तोदय चंद्र ग्रहण का योग बनेगा।पढ़ें पूरी खबर
