ग्वालियर के टोपी बाजार क्षेत्र से बेहद दुखद घटना शुक्रवार को सामने आई थी। शिक्षा विभाग की रिटायर्ड क्लर्क उर्मिला भदौरिया (70) की घर में मौत हो गई। शव पांच दिन तक कमरे में पड़ा सड़ता रहा। मृतका के मानसिक रूप से कमजोर बच्चे बेटा अखंड (40) और बेटी रितु (38) मां के शव के साथ पांच दिन तक ऐसे रहे कि जैसे मां जिंदा है। शुक्रवार को पुलिस उनके सामने ही शव को उठा कर ले गई, लेकिन वह घर से बाहर तक नहीं निकले। शनिवार रात को दोनों बच्चे कोतवाली थाना पहुंचे हैं और उन्होंने पुलिस अफसरों से कहा है कि उनकी मां खो गई है। उनकी मां कहीं मिल नहीं रही है। हालांकि पुलिस का कहना है कि दोनों बच्चों को थाने बुलवाया था। उनको उनके रिश्तेदार अपने साथ गांव ले गए हैं। मृतका के बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हैं और उनको अभी भी नहीं पता है कि उनकी मां हमेशा के लिए साथ छोड़ गई है। आसपास रहने वालों ने बताया था कि वह महीनों से बाहर नहीं निकलते थे। घर की छत पर सालों से कचरा जमा हो रहा है। जबकि महिला का बेटा बी-टेक व बेटी बीएससी किए हुए हैं। 5 दिन तक कुछ भी समझ नहीं पा रहे थे ग्वालियर के टोपी बाजार के जालम सिंह का बाड़ा में रहने वाली एक बुजुर्ग मां उर्मिला भदौरिया जिसने असमय पति को खोया। अकेले जिंदगी भर अपने बच्चों को संभाला। मेहनत कर उन्हें पढ़ाया-लिखाया। अपनी हिम्मत से जीवन भर बच्चों की मानसिक कमजोरी को हराया। वही मां जब बीमार हुई तो अपने घर में बेबस पड़ी रही। धीरे-धीरे सांसें थम गईं। करीब 5 दिन तक उनका शव कमरे में सड़ता रहा। बेटा-बेटी समझ नहीं पा रहे थे क्या करें, क्या नहीं। वे रुहासी हाल में निर्जीव शव के आसपास ही घूमते रहे। सामान्य दिनचर्या जीते रहे, जबकि मां के शव में कीड़े पड़ते रहे। जब बदबू बाहर से दौड़ी तो आसपास के लोगों को कुछ अजीब लगा और पुलिस को सूचना दी तो यह खुलासा हुआस है। बता देंे कि उर्मिला की शादी 45 साल पहले सुरेंद्र सिंह भदौरिया से हुई थी। उर्मिला उनकी दूसरी पत्नी थीं। पहली पत्नी की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई थी। समय बीता, घर में बेटा अखंड प्रताप सिंह और बेटी रितु भदौरिया का जन्म हुआ। दोनों पढ़े-लिखे हैं। बेटे ने बीटेक व एमटेक किया और बेटी ने बीएससी तक पढ़ाई की। मां ही थी दुनिया, पांच दिन तक लाश के साथ रहे बच्चे कुछ दिन पहले उर्मिला की तबीयत बिगड़ी और करीब 5 दिन पहले उनका निधन हो गया। जिन बच्चों की दुनिया ही मां थी, वे यह समझ ही नहीं पाए कि वो नहीं रहीं। पांच दिन तक बेसुद बच्चे उसी घर में मां के निर्जीव शरीर के आसपास रहे। पांच दिन तक घर में मां का शव सड़ता रहा। कीड़े पड़ गए, लेकिन बच्चों न कुछ किया और न किसी को बताया। वह ऐसे सामान्य जीवन जी रहे थे कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। सबको छोड़ दिया… ताकि बच्चे मजाक न बने बीटेक और बीएससी कर चुके बच्चों की मानसिक कमजोरी पर रिश्तेदारों की फुसफुसाहट, समाज की हंसी, मोहल्ले के तंज… इन सबने उर्मिला को भीतर से तोड़ दिया। उन्होंने समाज-रिश्तेदारों से दूरी बना ली। दो कमरों का घर ही उनकी दुनिया बन गया। उसी घर में मां रसोई संभालतीं, बच्चों को खिलातीं-पिलातीं और जीवन चुपचाप बीतता रहा। भतीजा बोला- कार्ड देने गया तो बीमार थीं ताई महिला के रिश्तेदार धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने बताया कि 28 जनवरी को वे भतीजे की शादी का निमंत्रण देने ताई उर्मिला भदौरिया के घर गए थे। तब ताई बीमार थीं। ताई ने वर्षों से रिश्तेदारों से दूरी बना ली थी। न किसी से बातचीत करती थीं और न मोहल्ले में किसी से मतलब रखती थीं। बच्चों को लग रहा मां कहीं चली गई हैं कोतवाली थाना प्रभारी मोहिनी वर्मा ने बताया कि मां के बाद अब भी बच्चे उसकी मौत की बात को समझ नहीं पा रहे हैं। उनको लग रहा है कि मां कहीं चली गई है। वृद्धा के बच्चों को उनके रिश्तेदार साथ ले जा रहे हैं। यह खबर भी पढ़ें… मां के शव के साथ 5 दिन घर में रहे भाई-बहन ग्वालियर के कोतवाली थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। दही मंडी स्थित मदन मोहन मार्केट में एक बेटे और बेटी ने अपनी मृत मां के शव के साथ करीब 4-5 दिन बिताए। पड़ोसियों को बदबू आने पर घटना का खुलासा हुआ। पूरी खबर यहां पढ़ें…
