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ग्वालियर की बेटी का टीम इंडिया तक का संघर्ष…:कोरोना ने ग्राउंड छीना तो पापा ने छत को बनाया मैदान, अब फिरकी से गिराएंगी गिल्ली

ग्वालियर की गलियों से उठी मेहनत अब टीम इंडिया की जर्सी तक पहुंच गई है। माधव नगर निवासी अनुष्का शर्मा (22) ने बेहतर प्रदर्शन के दम पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाई है। 17 अप्रैल से साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज में उनका चयन हुआ है। इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। 2022 में इंदौर में टूर्नामेंट के दौरान रन लेते समय वह मैदान पर ही बेहोश हो गई थीं। बाद में डेंगू होने की पुष्टि हुई, लेकिन इससे उनका हौसला नहीं टूटा। मंगलवार को ग्वालियर में मौजूद अनुष्का ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने अनुभव साझा किए। वनडे-टेस्ट हो या टी-20 फार्मेट… जैसे गेम की डिमांड होती है वैसे ही खिलाड़ी खेलता है क्रिकेट से रिश्ता कैसे जुड़ा, किस पल तय किया कि यही रास्ता है?
अनुष्का: मैं बड़े भाई को क्रिकेट खेलते देखती थी। 4 या 5 साल की उम्र में मैंने पहली बार बैट पकड़ा था। 14 साल की हुई तो तय किया कि मुझे क्रिकेटर बनना है। इंटरनेशनल डेब्यू सामने है। जिम्मेदारी व दबाव के बीच खुद को कैसे रेडी कर रहीं?
– मैं स्पिनर होने के साथ बैटर भी हूं। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने देश के लिए खेलना है। कोच-अभिभावकों की नजरों में खरा उतरना है। मेरा लक्ष्य बैटिंग के साथ-साथ फिरकी से विकेट गिराना भी रहेगा। बाकी मेरा लक। डब्ल्यूपीएल से लेकर इस कॉल-अप तक उतार-चढ़ाव में किसने सबसे ज्यादा संभाला?
– मैं खुद को लकी मानती हूं। मेरी फैमिली का पूरा सपोर्ट रहा है। पापा व्यस्त रहते हैं, लेकिन उनका फोकस मुझ पर रहा। मेरे करियर को आगे ले जाने में भैया का भी बड़ा योगदान है। कभी ऐसा पल आया जब लगा हालात आपको तोड़ देंगे। खुद को कैसे संभाला?
– कोरोनाकाल में लंबे समय तक लॉकडाउन में जिम और मैदान बंद रहे। मैं काफी परेशान थी। पापा ने मेरी परेशानी समझ घर की छत पर नेट लगवाया। एक हिस्से को जिम बनाया। वहीं प्रैक्टिस जारी रखी। टी-20 के दौर में आक्रामक खेल बढ़ा है। इससे क्रिकेट की खूबसूरती प्रभावित हो रही?
– मुझे ऐसा नहीं लगता कि टी-20 से क्रिकेट को नुकसान हो रहा है। जैसे वनडे और टेस्ट फॉर्मेट हैं, वैसे ही टी-20 है। जिस फॉर्मेट की डिमांड है, खिलाड़ी को उसी हिसाब से खेलना पड़ता है। छोटे शहरों के खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती क्या है और क्या बदलना चाहिए?
– सभी प्रकार के खेलों में सुधार की दिशा में अभी और काम होना चाहिए। प्रैक्टिस और ट्रेनिंग सेशन के साथ ग्राउंड बढ़ाने चाहिए।

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