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गुरु के प्रभाव से धर्म-सत्य की जीत के संकेत:युद्ध को लेकर ज्योतिषाचार्य का दावा, दादागिरी करने वालों को मिलेगा सबक

वैश्विक स्तर पर ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ज्योतिषीय विश्लेषण एक अलग तस्वीर पेश कर रहा है। ज्योतिषाचार्य व ज्योतिष मठ संस्थान के अध्यक्ष पं. विनोद गौतम के अनुसार ग्रहों की चाल में हो रहे बदलाव आने वाले समय में युद्ध जैसे हालात को कमजोर कर सकते हैं, वहीं इस संघर्ष का अंत धर्म और सत्य की जीत के रूप में सामने आ सकता है। उन्होंने बताया कि राहु और मंगल पिछले लगभग एक माह से कुंभ राशि में युति कर रहे थे। राहु को दैत्यों का सेनापति और मंगल को देवताओं का सेनापति माना जाता है। दोनों का एक ही राशि में होना टकराव और युद्ध जैसी परिस्थितियों को जन्म दे रहा था। इसी दौरान वैश्विक स्तर पर तनाव और संघर्ष की स्थितियां भी बनी रहीं। गौतम के अनुसार 2 अप्रैल को रात 10 बजे के बाद मंगल मीन राशि में प्रवेश करेगा, जिससे राहु और मंगल की युति टूट जाएगी। इस बदलाव के साथ ही युद्ध को बढ़ावा देने वाले ग्रहों का प्रभाव कमजोर पड़ेगा और 2 अप्रैल के बाद हालात में नरमी आने की संभावना बनेगी। हालांकि मीन राशि में मंगल और सूर्य की युति से अंगारक योग बनेगा, जो कुछ समय तक प्रभावी रहेगा।
ज्योतिषाचार्य व ज्योतिष मठ संस्थान के अध्यक्ष पं. विनोद गौतम का कहना है कि ग्रहों की वर्तमान स्थिति इस युद्ध के परिणाम को स्पष्ट संकेत दे रही है, जिसमें अंततः धर्म और सत्य की जीत होगी। उन्होंने बातचीत में बताया कि गुरु का कर्क राशि में स्थित होना इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभा रहा है। गुरु को सामाजिक और धार्मिक ग्रह माना जाता है, ऐसे में उसका प्रभाव यह दर्शाता है कि इस संघर्ष में अंततः धर्म और सत्य की विजय होगी। गौतम के अनुसार जो पक्ष इस समय आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं और ‘दादागिरी’ की स्थिति में नजर आ रहे हैं, उन्हें इस युद्ध से सबक मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके परिणाम स्वरूप आक्रामक पक्षों को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह युद्ध केवल जीत-हार का नहीं, बल्कि सीख देने वाला भी साबित होगा। जो ताकतें इस समय दबाव बनाने की कोशिश कर रही हैं, उन्हें परिस्थितियां नियंत्रित करने का संदेश मिलेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से यह भी संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में ग्रहों के प्रभाव में बदलाव के साथ मौजूदा तनाव में कमी आ सकती है। हालांकि, हालात पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है।
14 अप्रैल के बाद खत्म होंगे प्रमुख अशुभ योग
ज्योतिषीय गणना के मुताबिक 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ अंगारक योग समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही शनि और सूर्य की युति भी खत्म होगी। इस तरह शनि, राहु और मंगल जैसे क्रूर ग्रहों का संयुक्त प्रभाव टूटने से बड़े युद्ध जैसे विनाशकारी हालात टल सकते हैं। जनवरी से बन रहा था संकट काल
ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के अनुसंधान के अनुसार जनवरी 2026 से ही ग्रहों की स्थिति संकट की ओर इशारा कर रही थी। चतुर्ग्रही और पंचग्रही योग, कम अंतराल में दो ग्रहण, रौद्र संवत्सर और रुद्रवीसी जैसे योगों ने तनावपूर्ण परिस्थितियां निर्मित की थीं। गुरु के प्रभाव से धर्म और सत्य की जीत
पं. गौतम ने बातचीत में यह भी कहा कि गुरु का कर्क राशि में स्थित होना इस पूरे घटनाक्रम में निर्णायक भूमिका निभा रहा है। गुरु को सामाजिक और धार्मिक ग्रह माना जाता है, ऐसे में इसके प्रभाव से इस युद्ध में अंततः धर्म और सत्य की जीत होगी। उन्होंने कहा कि जो पक्ष इस समय आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं और दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें इस संघर्ष से सबक मिलेगा। यह युद्ध केवल ताकत का प्रदर्शन नहीं रहेगा, बल्कि आक्रामक शक्तियों को अपनी सीमाओं का एहसास भी कराएगा। मई में और मजबूत होंगे सकारात्मक संकेत
11 मई को मंगल के मेष राशि में प्रवेश के बाद राहु से उसकी दूरी दो राशियों तक बढ़ जाएगी, जो और अधिक सकारात्मक प्रभाव देगा। इससे युद्ध जैसे हालात और कमजोर पड़ सकते हैं। प्राकृतिक प्रकोप की आशंका बरकरार
हालांकि ग्रहों की मौजूदा स्थिति पूरी तरह राहत देने वाली नहीं है। ज्योतिषीय संकेत बताते हैं कि आने वाले समय में प्राकृतिक आपदाएं, भूमि हलचल और तेज तूफान जैसी घटनाएं भी देखने को मिल सकती हैं।

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