गर्मी की शुरुआत के साथ ही राजधानी में पानी की समस्या तेजी से बढ़ने लगी है। मार्च के पहले 18 दिनों में ही सीएम हेल्पलाइन पर 438 शिकायतें दर्ज हुई हैं, यानी रोज औसतन 24 से ज्यादा शिकायतें। पिछले साल इसी अवधि में 276 शिकायतें थीं, जो प्रतिदिन करीब 15 थीं। इस तरह एक साल में शिकायतों में करीब 60% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। प्रदेश के बड़े शहरों में इंदौर में सबसे ज्यादा 803 शिकायतें दर्ज हुई हैं। भोपाल इस मामले में दूसरे स्थान पर है। ग्वालियर में 384 और जबलपुर में 166 शिकायतें सामने आई हैं। नगर निगम द्वारा 6080 स्थानों से 12,969 सैंपल जांच के लिए भेजे गए। इनमें आदमपुर, खानूगांव, ईदगाह हिल्स और कोलार के गेहूंखेड़ा सहित 6 सैंपलों में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है। निशातपुरा, करोंद, गौतम नगर, शाहजहांनाबाद, परी बाजार, ईदगाह हिल्स और अयोध्या बायपास क्षेत्रों में कम प्रेशर की शिकायतें हैं। शिकायतें और मुख्य वजह क्षमता पर्याप्त, फिर भी सप्लाई प्रभावित शहर में रोज करीब 450 मिलियन लीटर पानी सप्लाई हो रहा है, जबकि कुल क्षमता 540 मिलियन लीटर है। गर्मियों में मांग करीब 20 एमएलडी तक बढ़ जाती है। जरूरत पड़ने पर नर्मदा, कोलार, केरवा और बड़े तालाब से अतिरिक्त पानी लिया जाता है, लेकिन इसके बावजूद कई इलाकों में कम प्रेशर और गंदे पानी की शिकायतें बनी हैं। सिस्टम पर बढ़ता दबाव
भोपाल के करीब 85% हिस्से में नगर निगम पानी सप्लाई करता है। वर्तमान में 2.71 लाख कनेक्शन हैं, जो आने वाले वर्षों में 3.10 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। शहर में प्रति व्यक्ति 150 लीटर पानी सप्लाई के मानक पर काम किया जा रहा है। इसके लिए 13 पंप हाउस रोज 18 से 20 घंटे संचालित होते हैं, जिन्हें गर्मियों में 24 घंटे तक चलाया जाता है।
