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कुत्ते ने बच्चे को काटा…रेबीज-इंजेक्शन लगने पर भी मौत:दिमाग तक पहुंचा वायरस, पड़ोसी ने सिर-गर्दन नोचते छुड़ाया था; अब परिवार को खतरा

मध्य प्रदेश के दतिया में आवारा कुत्ते के काटने के 25 दिन बाद 6 साल के बच्चे की मौत हो गई। बच्चे को एंटी-रेबीज वैक्सीन की तीन डोज दी जा चुकी थीं, लेकिन सिर और गर्दन पर काटने की वजह से वायरस तेजी से दिमाग तक पहुंच गया, जिससे बच्चे की जान नहीं बच पाई। हालांकि कुछ दिनों बाद कुत्ता भी गांव में मरा मिला है। मामला दतिया के सपा पहाड़ क्षेत्र का है। अशोक प्रजापति का 6 वर्षीय बेटा हंस प्रजापति 13 जनवरी की दोपहर घर के बाहर खेल रहा था, तभी गली में घूम रहे एक आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। कुत्ते ने बच्चे के सिर, हाथ और गर्दन को नोच डाला। पड़ोस में रहने वाली सीमा कुशवाहा ने बताया कि कुत्ते के हमले से बच्चा चीख रहा था। बच्चे की चीख सुनकर दौड़कर मौके पर पहुंचीं। कुत्ते को भगाया। बच्चा लहूलुहान हो चुका था। दर्द से कराह रहा था। परिजन तत्काल बच्चे को दतिया जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। आखिरी डोज से पहले बच्चे की मौत इस दौरान डॉक्टर्स ने एंटी-रेबीज वैक्सीन, टिटनेस का इंजेक्शन और इम्युनोग्लोबिन लगाया। तय डेट के मुताबिक 16 जनवरी को दूसरी और 20 जनवरी को तीसरी डोज दी गई। अंतिम डोज 10 फरवरी को लगनी थी, लेकिन 6 फरवरी की शाम बच्चे में रेबीज के गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे। हंस प्रजापति स्कूल से घर आया तो सिर दर्द की शिकायत की। इस दौरान उसके मुंह से लार बह रही थी। हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल के पीआईसीयू में भर्ती किया गया। यहां से डॉक्टर्स ने ग्वालियर रेफर किया। परिजन ग्वालियर से झांसी लेकर गए, लेकिन रविवार की रात बच्चे ने दम तोड़ दिया। परिवार को सता रहा संक्रमण का डर बच्चे के दादा पूरन प्रजापति ने बताया कि ग्वालियर और झांसी के डॉक्टर्स ने परिवार को तुरंत वैक्सीनेशन कराने की सलाह दी है। डॉक्टर्स ने कहा है कि बच्चे में रेबीज के लक्षण उभर आए थे। परिवार के सदस्य संपर्क में थे। लार या शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। पूरन प्रजापति ने बताया कि इस सलाह के बाद परिवार दहशत में है। हमें भी डर लग रहा है कि कहीं किसी को कुछ हो न जाए। हॉस्पिटल में वैक्सीनेशन कराने जाएंगे, ताकि परिवार के लोग सुरक्षित रह सकें। इलाज में लापरवाही का आरोप मृतक के चाचा हरिराम प्रजापति ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में बच्चे का अच्छे से इलाज नहीं किया गया। 13 जनवरी को काटने के बाद सभी वैक्सीन लगी थीं। 6 फरवरी को तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल लेकर गए, लेकिन समय रहते सही इलाज नहीं मिला। डॉक्टरों ने देर से रेफर किया। नगर पालिका ने कहा- कुत्तों को मार दो, हम उठा लेंगे परिजनों और मोहल्ले वालों का आरोप है कि क्षेत्र में आवारा कुत्तों का झुंड सक्रिय है। इससे पहले भी ये कुत्ते बच्चों और पालतू जानवरों पर हमला कर चुके हैं। नगरपालिका में कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि अधिकारियों ने कहा कि कुत्तों को मार दो, हम उठा लेंगे। मजबूरी में मोहल्ले के लोगों ने तीन-चार कुत्तों को मारकर गली से बाहर फेंक दिया। रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह पता चलेगी दतिया कलेक्टर स्वप्निल बान ने कहा कि अस्पताल में वैक्सीन उपलब्ध थी। बच्चे को वैक्सीन लगाई गई थी। मौत की सही वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगी। नगर पालिका से शिकायत की गई थी। नगर पालिका भी अपना काम कर रही है। दतिया कलेक्टर ने यह भी बताया कि नगर पालिका लगातार आवारा कुत्तों के लिए नसबंदी और वैक्सीनेशन प्रोग्राम चला रही है। हालांकि, हाई कोर्ट के दिशा निर्देशों के आधार पर जांच भी की जाएगी। एक्सपर्ट व्यू- 5 डोज लगना जरूरी मेडिकल कॉलेज के डॉ. पी. अधिकारी (प्राध्यापक, पीएसएम विभाग) ने बताया कि कुत्ते या किसी संदिग्ध जानवर के काटने पर तुरंत एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी है। अगर काटने की जगह गर्दन, सिर या कंधे के ऊपर हो, या गहरा घाव हो, तो वैक्सीन के साथ इम्युनोग्लोबिन भी अनिवार्य है। तीन डोज के बाद शरीर में एंटीबॉडी बनती हैं, लेकिन सुरक्षा करीब 95 प्रतिशत रहती है। रेबीज से पूरी सुरक्षा के लिए सभी पांच डोज समय पर लगवाना जरूरी है। देश में पहले भी आए ऐसे मामले इंडियन एक्सपर्ट ग्रुप की चर्चाओं में यह बात सामने आई है कि एंटी-रेबीज वैक्सीन की सभी डोज लगने के बाद भी कुछ मामलों में मौतें हुई हैं। 2024, कोल्हापुर: 21 वर्षीय युवती की मौत, सभी डोज लगने के बावजूद। सितंबर 2025, रॉयपेट्टा (तमिलनाडु): ऑटो चालक की मौत, पूरी वैक्सीन के बाद। डॉग बाइट पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- सरकारों से भारी मुआवजा दिलवाएंगे सुप्रीम कोर्ट ने डॉग बाइट को लेकर कहा था कि बच्चों या बुजुर्गों को कुत्तों के काटने, चोट लगने या मौत के हर मामले में हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा दिलवाएंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले 5 सालों में नियमों को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा था कि आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। अगर आपको इन जानवरों से इतना प्यार है, तो इन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते। ये कुत्ते सड़कों पर क्यों घूमते रहें, लोगों को काटें और डराएं। उन्हें हम ऐसे ही नहीं छोड़ सकते। सवाल: कुत्ता काट ले तो सबसे पहले क्या करना चाहिए? जवाब: कुत्ता काट ले तो घबराएं नहीं। आगे की बातें नीचे लगे क्रिएटिव से समझें और दूसरों को शेयर भी करें।

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