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कांग्रेस के मंच पर ‘दे-दनादन’, नकुलनाथ के सामने भिड़े नेता:जीतू पटवारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में छाया अंधेरा; दिग्विजय के विधायक बेटे बने ‘कचौरी वाले’

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। बिजली गुल, पटवारी ने फौरन सरकार को घेरा
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, तभी अचानक बिजली गुल हो गई और अंधेरा छा गया। विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का इससे बेहतर मौका क्या होता। फिर क्या था, पटवारी ने मौके पर चौका जड़ दिया। बिजली गुल होते ही जीतू पटवारी ने अपनी बात बीच में रोकते हुए कहा- देख लो ये हालात हैं। जब देखो, तब बिजली चली जाती है और कहते हैं 24 घंटे बिजली देंगे। उन्होंने आगे कहा कि सरकार एक तरफ बहनों को 1500 रुपए देने की बात करती है, तो दूसरी ओर भारी-भरकम बिजली बिल थमा रही है। खरी बात यह है कि राजनीति में विपक्ष के लिए ऐसे मौके सोने पर सुहागा जैसे होते हैं। यही सियासत की रवायत भी है। हालांकि, पटवारी के इस हमले पर सत्ताधारी दल के लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं- पटवारी जी, बिजली के मामले में जरा दिग्विजय सिंह शासन को भी याद कर लेते। पूर्व सांसद के सामने ही भिड़े कांग्रेस नेता
नरसिंहपुर में कांग्रेस के भीतर ‘दे दनादन’ हो गई। वो भी छिंदवाड़ा के पूर्व सांसद नकुलनाथ के सामने। नकुलनाथ अपना भाषण खत्म कर मंच से नीचे उतरे ही थे और मीडिया से बात कर रहे थे, तभी हंगामे की आवाज आई। पीछे मुड़कर देखा तो पार्टी नेता आपस में भिड़ गए थे। अपनी ही पार्टी में मचे बवाल का नजारा देख नकुलनाथ वहां से निकल गए। दरअसल, जिला कांग्रेस कमेटी रानी अवंतीबाई लोधी का 168वां बलिदान दिवस मना रही थी, इस कार्यक्रम में नकुलनाथ मुख्य अतिथि थे। हुआ यूं कि कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा प्रत्याशी लाखन सिंह पटेल का भाषण चल रहा था। समय की कमी के चलते आयोजकों ने भाषण खत्म करने का इशारा किया, जो उनके एक रिश्तेदार कपिल पटेल को नागवार गुजरा। जब तक नकुलनाथ मंच पर थे, मामला शांत रहा, लेकिन उनके उतरते ही गाली-गलौज और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने मोर्चा संभाला और दोनों पक्षों को अलग किया। अब कांग्रेस भले ही एकजुटता के लाख दावे करे, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर गुटबाजी को उजागर कर दिया। वर्चस्व की लड़ाई सड़क पर आ गई और पार्टी की किरकिरी भी हो गई। कांग्रेस विधायक जयवर्धन बने ‘कचौरी वाले’
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के विधायक बेटे जयवर्धन सिंह अपने शहर राघौगढ़ में अलग ही अंदाज में नजर आए। उन्होंने खुद अपने हाथों से कार्यकर्ताओं को कचौरी खिलाई और कहते दिखे- गरमा-गरम कचौरी है, भजिए भी हैं। इस दौरान माहौल हल्का-फुल्का भी रहा। जब एक कार्यकर्ता ने कचौरी लेने के लिए हाथ बढ़ाया, तो जयवर्धन ने मजाक में कहा- आपके तो दांत ही नहीं हैं। उनकी इस बात पर जमकर ठहाके लगे। जयवर्धन सिंह ने इसी बहाने गैस संकट पर सरकार पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि आजकल एलपीजी की ही सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। इस पर कार्यकर्ताओं ने भी चुटकी ली और कहा- ये कचौरियां तो लकड़ी वाली भट्ठी पर बनी हैं। अब लोग कह रहे हैं कि ये सियासत है भाई, यहां जनता के दिल में बने रहना है तो कचौरियां भी खिलानी पड़ती हैं। भाजपा विधायक ने अफसरों की लगाई क्लास
डिंडौरी में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के दौरान शहपुरा से भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने अपनी ही सरकार के कामकाज पर सवाल उठा दिए। उन्होंने नर्मदा की सफाई को लेकर नाराजगी जताई। धुर्वे ने कहा कि अमरकंटक से निकलने के बाद डिंडौरी पहला ऐसा शहर है, जो मां नर्मदा को सबसे ज्यादा प्रदूषित कर रहा है। उन्होंने सीवरेज प्रोजेक्ट की पोल खोलते हुए बताया कि जो काम 3 साल में पूरा होना था, वह 10 साल बाद भी अधूरा है। उन्होंने मंच पर मौजूद अधिकारियों को भी खरी-खोटी सुनाई। कहा कि नेता सलाह दे सकते हैं, लेकिन काम करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। सिर्फ तामझाम वाले कार्यक्रमों से जमीन पर बदलाव नहीं आएगा। विधायक ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने शहर के विकास के लिए 3 करोड़ रुपए मंजूर किए, लेकिन अब तक उसकी डीपीआर तक तैयार नहीं हो पाई है। अब लोग भाजपा विधायक के इन बयानों को लेकर चुटकी ले रहे हैं। कह रहे हैं कि ये काम तो विपक्ष के लिए छोड़ देते। इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल), आशीष रघुवंशी (गुना), आकाश कौरव (नरसिंहपुर), अभिमन्यु सिंह (डिंडौरी) ये भी पढ़ें –
जब कलेक्टर का भैंस से हुआ सामना: पूर्व मंत्री ने तालियों से कराया सीएम का ध्यानाकर्षण खंडवा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता भैंस लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। ‘प्रशासन’ लिखे पोस्टर चस्पा कर भैंस को ही ‘साहब’ बना दिया। इसी दौरान संयोग से कलेक्टर ऋषभ गुप्ता वहां आ गए। वे भैंस के साथ प्रदर्शन कर रहे छात्र नेताओं को देखकर चौंक गए। लेकिन बिना कुछ कहे किनारे से निकल लिए। पूरी खबर पढ़ें

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