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ऑनलाइन गेम में 4 लाख हारा, पत्नी-बेटी-कारोबारी ने पीया जहर:बेटी बोली थी-पापा ने कुछ पिला दिया…बचा लो, कर्ज से परेशान होकर कारोबारी ने खुद पिलाया जहर

पापा दो लीटर की कोका-कोला की बोतल लाए थे। मम्मी और मुझे दो-दो गिलास कोल्ड ड्रिंक दी। दो गिलास भरे और खुद पी लिए। बाकी कोल्ड ड्रिंक रखने को कहा। जब अंशु आएगा, तो वह भी पी लेगा। थोड़ी देर बाद हमारी हालत बिगड़ने लगी। यह बयान गुरुवार सुबह मौत होने से पहले स्वाति गुप्ता (16) ने पुलिस के सामने दिया था। उसकी मां राजकुमारी गुप्ता (38) शहडोल मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती है। वहीं, पिता शंकर लाल (40) गुरुवार रात दम तोड़ चुके हैं। वहीं, पड़ोसियों ने बताया- स्वाति ने खुद फोन कर कहा कि पापा ने कुछ पिला दिया है, बचा लो। शुरुआत में बात को हल्के में लिया, लेकिन जब उल्टियों में तेज बदबू आई और उन तीनों की हालत बिगड़ती गई, तब अस्पताल भागे दरअसल, शहडोल की पुरानी बस्ती में रहने वाले शंकर लाल ने 24 फरवरी की रात पत्नी-बेटी को जहर पिला दिया, फिर खुद पी लिया। इलाज के दौरान पहले बेटी स्वाति, फिर शंकर लाल की जान चली गई। बेटा बोला- आर्थिक तंगी की वजह से तनाव में थे बेटे अनिकेत (15) ने बताया कि पिताजी को ऑनलाइन गेम ‘बीडीजी’ खेलने की लत थी। गेम में करीब 4 लाख रुपए हार चुके थे। इसके लिए लोगों से कर्ज भी लिया था। कर्ज के बढ़ते बोझ और आर्थिक तंगी की वजह से पिता टेंशन में थे। कभी खुद की मोबाइल दुकान चलाने वाला शंकर अब सड़क किनारे छोटी सी दुकान लगाकर गुजारा करने को मजबूर था। बहन के दाह संस्कार के बाद गुरुवार को बेटे अनिकत ने पिता की चिता को भी मुखाग्नि दी। इसके बाद से वह बदहवास है। एक दिन पहले 50 हजार गंवाए थे शंकरलाल कोतवाली थाना क्षेत्र की पुरानी बस्ती में परिवार के साथ रहता था। बेटी स्वाति 11वीं की छात्रा थी। उसकी परीक्षाएं कुछ दिनों में शुरू होने वाली थीं। शंकरलाल के भतीजे राजीव गुप्ता ने बताया कि चाचा पहले शहडोल के बाबा मोबाइल में काम करते थे। इसी दौरान उन्हें ऑनलाइन गेम की लत लग गई। वह ‘बीडीजी’ और एविएटर नाम के ऑनलाइन गेम में पैसे लगाकर खेलने लगे। बाद में अनूपपुर में खुद बाबा मोबाइल नाम से दुकान खोल ली। ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण अनूपपुर की दुकान बंद हो गई। चार लाख से ज्यादा रुपए गंवा चुके थे चाचा इसके बाद शहडोल आकर गंज के समीप सड़क पर इलेक्ट्रॉनिक सामान और मोबाइल एसेसरीज की टेबल लगाकर बेचने लगे। ऑनलाइन गेम में अब तक करीब चार लाख से ज्यादा रुपए गंवा चुके थे। सोमवार को चाचा 50 हजार रुपए हार गए थे। उन्होंने 20 हजार रुपए और जुटाए। इसके बाद से वे ज्यादा तनाव में रहने लगे। चाचा को जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। बेटे को दोस्त की दुकान में छोड़कर आया अनिकेत 10वीं का छात्र है, उसकी बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। मंगलवार को शंकरलाल खुद उसे पेपर दिलाने लेकर गया था। दोपहर के बाद वह उसे बाजार की तरफ लेकर निकला। बेटे को दोस्त सतीश की दुकान पर बैठा दिया। खुद चाय पीने की बात कहकर निकल आया। इसके बाद वह कोल्ड ड्रिंक लेकर घर की तरफ आया। तब बेटी और मां ने पूछा कि अनिकेत कहां है। उसने बताया कि वह सतीश की दुकान पर बैठा है। पुलिस का मानना है कि वह जानबूझकर अनिकेत को छोड़कर आया था, यानी वह बेटे को मारना नहीं चाहता था। बेटी ने पापा के दोस्त को फोन किया– हमें बचा लो कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद हालत बिगड़ने लगी, तो स्वाति ने पहले पिता के दोस्त सतीश को फोन किया, जहां उसका भाई बैठा था। बताया कि पिता ने उन्हें कुछ पिलाया है, जिसके बाद लगातार उल्टियां हो रही हैं। यह सुनकर सतीश और अनिकेत तुरंत घर की तरफ भागे। इसके बाद अनिकेत ने अपने चचेरे भाई को फोन किया। इस बीच सतीश खुद दुकान बंद करके आ गया। उसने अंदर देखा तो मां-बेटी आंगन में उल्टी कर रही थीं। शंकर लाल छत पर बेहोश पड़ा था। एक बार बड़ा जीत गया, तो सब रिकवर कर लूंगा शंकरलाल के करीबी बताते हैं, “ उसे कई बार समझाया था। सतीश मोबाइल वाले दोस्त और परिवार ने भी। वो कहते थे कि एक बार बड़ा जीत गया, तो सब रिकवर कर लूंगा। यही सोच उसे गेम से दूर नहीं कर पाई। परिवार इससे परेशान था। वह कर्ज लेकर गेम में पैसे लगाता जा रहा था। बेटे का कल पेपर, दो अंतिम संस्कार अनिकेत का शुक्रवार को पेपर है। अस्पताल की भागदौड़ के बीच उसने बहन का अंतिम संस्कार किया। अगले दिन पिता का पोस्टमॉर्टम और उनके शव को भी मुखाग्नि दी। परिजन का कहना है कि एक बच्चा, जिस पर किताबों का बोझ होना चाहिए, वह श्मशान की आग देख रहा है। ढाई साल की लत: ‘रिकवर’ करने की भूल परिजन के मुताबिक, शंकर को “रिकवर करने” की आदत लग गई थी। वह कहता था कि “आज 8 हजार लगाकर 8 लाख जीते” जैसे किस्से उसे खींचते थे। हारने के बाद पुराना नुकसान निकालने के लिए दांव बढ़ाना, यही चक्र चलता रहा। बैंक से भी लोन लिया, जान-पहचान वालों से भी मांगा। एक करीबी रिश्तेदार ने बताया कि उसने “60 हजार रुपए मांगे थे, लेकिन हमने नहीं दिए। पता था कि यह पैसा गेम में जाएगा। मां कह रही मुझे बेटी और बेटा से मिला दो मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती मां की हालत गुरुवार सुबह से कुछ स्थिर है। परिजन ने बताया कि रात भर वह ऑक्सीजन की नली को निकाल कर फेंक रही थी। इसके बाद डॉक्टर ने उसके हाथ पैर बांध दिए थे। सुबह कुछ स्थिति सामान्य हुई, जिसके बाद से वह लगातार बेटा और बेटी से मिलने की जिद कर रही है। वह बार-बार कह रही है कि मुझे बेटा-बेटी से मिलवा दो। पुलिस ने जब्त किया मोबाइल कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में आर्थिक तंगी और ऑनलाइन गेम में नुकसान को कारण माना जा रहा है। पुलिस को फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। पुलिस ने मोबाइल जब्त कर जांच में लिया है। ऑनलाइन गैंबलिंग मध्यप्रदेश में बैन मध्यप्रदेश में जुआ और सट्टेबाजी पर पब्लिक गैंबलिंग कानून लागू है, जिसके तहत अवैध जुआ प्रतिबंधित है। ऑनलाइन सट्टेबाजी को लेकर भी राज्य सख्ती के संकेत देता रहा है। अगर कोई प्लेटफॉर्म बिना वैध लाइसेंस के पैसे लेकर बेटिंग संचालित करता है, तो वह मान्य नहीं है। ऐसे में BDG और एविएटर जैसे रियल-मनी गेम्स की वैधता संदिग्ध मानी जाती है। …………………………………….. यह खबर भी पढ़ें शहडोल में मोबाइल कारोबारी ने पत्नी-बेटी को जहर दिया, खुद भी पीया… शहडोल में ऑनलाइन गेम की लत और इसके चलते कर्ज से परेशान होकर मोबाइल कारोबारी ने पत्नी-बेटी को जहर पिला दिया। फिर खुद पी लिया। इलाज के दौरान पहले बेटी, फिर कारोबारी की जान चली गई। पत्नी मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में मौत से जंग लड़ रही है। पढ़ें पूरी खबर…

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