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एमपी के अफसर से होगी 1.5 करोड़ की वसूली:बीज विकास निगम के मैनेजर लाल सिंह की नौकरी खत्म, भास्कर के खुलासे के बाद एक्शन

दैनिक भास्कर एप की खबर का असर हुआ है। बीज एवं फर्म विकास निगम के सहायक प्रबंधक लालसिंह को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। विभाग के एमडी ने 24 मार्च को आदेश जारी किया। जिसमें सेवा समाप्ति के साथ लाल सिंह से वेतन की वसूली की भी सिफारिश की है। साथ ही लाल सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के भी आदेश दिए है। बता दें कि भास्कर ने 28 फरवरी को अपनी खबर में बताया था कि लालसिंह की नियुक्ति पिछले 22 साल से शक के दायरे में हैं। साल 2002 में उनकी विशेष भर्ती अभियान के तहत सहायक प्रबंधक पद पर नियुक्ति हुई थी।। भास्कर ने अपनी खबर में सारे तथ्यों को दस्तावेज समेत उजागर किया था कि नौकरी के लिए लालसिंह ने जो जाति प्रमाण पत्र और बाकी दस्तावेज दिए वो फर्जी हैं। वो 23 साल की नौकरी में अब तक 1.5 करोड़ रुपए वेतन के रूप में ले चुके हैं। इस खुलासे के बाद विभाग ने लाल सिंह को अपना पक्ष रखने के लिए कई बार नोटिस भी भेजे, लेकिन लालसिंह ने मूल दस्तावेजों की कॉपी पेश नहीं की। भास्कर की पड़ताल में हुआ धोखाधड़ी का खुलासा शिकायतकर्ता कर्मवीर चौहान ने सूचना के अधिकार के तहत लालसिंह के दस्तावेज जुटाए थे। RTI से पता चला कि जिस प्रकरण क्रमांक 2296 (दिनांक 19 अगस्त 2003) का जाति प्रमाण पत्र लाल सिंह ने जमा किया था, वो ग्वालियर के गोपालपुरा निवासी चंद्र किशोर यादव पिता चतुर्भुज सिंह के नाम से जारी हुआ था। यानी लाल सिंह ने एक ऐसे सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया, जो किसी और को आवंटित था। 28 फरवरी को दैनिक भास्कर एप पर ये खबर पब्लिश हुई थीं… फर्जी दस्तावेज से सरकारी नौकरी:बीज निगम के अफसर ले चुके 1.55 करोड़ सैलरी; भास्कर से बोले- खबर मत करो, बताओ करना क्या है? मध्य प्रदेश राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम में 23 साल से एक ऐसा अधिकारी प्रोडक्शन मैनेजर के पद पर बैठा है, जिसकी नींव ही धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज पर रखी गई है। उत्तर प्रदेश के झांसी निवासी लाल सिंह, मध्य प्रदेश का फर्जी जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र बनाकर न केवल नौकरी हासिल करने में कामयाब रहा, बल्कि पिछले 23 सालों में 1.55 करोड़ रुपए से अधिक का वेतन ले चुका है। इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा होने और कृषि विभाग के सचिव द्वारा सेवा समाप्ति और FIR के स्पष्ट आदेश के बावजूद, बीज निगम के आला अधिकारी उसे बचाने में लगे हैं। भास्कर ने इस पूरे मामले की गहन पड़ताल की, जिसमें सामने आया कि कैसे एक व्यक्ति सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर सालों तक सरकार को धोखा देता रहा और मध्य प्रदेश के एक अनुसूचित जाति के हकदार का अधिकार मारता रहा। पढ़िए रिपोर्ट…

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