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एमपी के अफसरों को नहीं भा रहा ‘मोदी मॉडल’:दो मंत्रियों की मंजूरी, लॉ डिपार्टमेंट की क्लीनचिट; जानिए क्यों लागू नहीं हुआ फायर सेफ्टी एक्ट

फायर ब्रिगेड एक से डेढ़ घंटा लेट आई। यदि समय पर आ जाती तो कुछ लोगों की जान बच जाती। टैंकरों में पानी नहीं था। एक टैंकर चालक दूसरी गली में घुस गया। उनके पास सीढ़ी भी नहीं थी। ये बातें इंदौर के रहने वाले सौरभ पुगलिया ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से की थी। 17 और 18 मार्च की दरमियानी रात बृजेश्वरी एनेक्स में रहने वाले रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के घर आग लगी और इस अग्निकांड में मनोज समेत परिवार के आठ सदस्यों की मौत हो गई। परिजन समेत कॉलोनी के लोगों का आरोप है कि फायर ब्रिगेड समय पर तो पहुंची ही नहीं बल्कि आग बुझाने में मिस मैनेजमेंट और लापरवाही भी दिखाई दी। सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दिए है साथ ही ये भी कहा है कि सिस्टम को दुरुस्त करेंगे। मगर, हकीकत ये है कि सरकार में बैठे अफसर ही सिस्टम को दुरुस्त नहीं करना चाहते। मप्र में अफसरों की मनमर्जी की वजह से ही पिछले 7 साल से फायर एक्ट लागू नहीं हो सका है, जबकि केंद्र सरकार 2019 में ही एक्ट का एक मॉडल ड्राफ्ट बनाकर सभी राज्यों को भेज चुकी है। मप्र छोड़कर 26 राज्य इसे लागू कर चुके हैं। आखिर ‘मोदी का मॉडल’ एमपी के अफसरों को क्यों पसंद नहीं आ रहा? फायर सेफ्टी एक्ट का ड्राफ्ट कहां फंसा हुआ है? इसे लागू करने में कहां पेंच फंस रहा? इसकी भास्कर ने पड़ताल की। पढ़िए रिपोर्ट… अब जानिए 7 साल से कैसे भटक रहा फायर सेफ्टी एक्ट का प्रस्ताव साल 2019: केंद्र ने सभी राज्यों को भेजा फायर एक्ट का मॉडल ड्राफ्ट
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों में एकरूपता लाने के लिए फायर एक्ट का एक मॉडल ड्राफ्ट भेजा। 16 सितंबर 2019 को केंद्र सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी ने इस संबंध में एक पत्र भेजा, जिसे नगरीय विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव ने नगरीय प्रशासन संचालनालय को भेज दिया। इसके बाद डायरेक्ट्रेट ने केंद्र के मॉडल ड्राफ्ट के आधार पर प्रस्तावित फायर एक्ट का प्रस्ताव पेश किया। एक प्रेजेंटेशन के बाद इसमें संशोधन के निर्देश दिए गए। साल 2020: कांग्रेस के तत्कालीन विभागीय मंत्री ने दी एक्ट को मंजूरी
10 फरवरी 2020 को संशोधित प्रस्ताव नगरीय प्रशासन विभाग के अपर आयुक्त को भेजा गया। 24 फरवरी 2020 को तत्कालीन आयुक्त पी नरहरी ने इसे अनुमोदन के लिए तत्कालीन प्रमुख सचिव संजय दुबे को भेजा। इसके बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन मंत्री जयवर्धन सिंह से मंजूरी मिलने के बाद फायर एक्ट को विधि विभाग भेजा गया। बाद में तत्कालीन पीएस संजय दुबे ने यह कहते हुए प्रस्ताव विधि विभाग से वापस ले लिया कि “मप्र भू-विकास नियम 2012” में पहले से ही फायर एक्ट से संबंधित प्रावधान हैं। साल 2021: हमीदिया अस्पताल में आग लगी नवजात की डेथ
इस साल आग लगने की एक बड़ी घटना हुई। 8 नवंबर 2021 को भोपाल के हमीदिया अस्पताल में आग लगने से 8 मासूमों की मौत हो गई थी। इसके बाद नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगर निगमों को फायर सेफ्टी ऑडिट के निर्देश दिए थे। इसी तरह सतपुड़ा भवन में भी भीषण आग लग गई थी। आग बुझाने के लिए सेना की मदद लेना पड़ी। हमीदिया और सतपुड़ा आग की घटनाओं के बाद तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह ने मामले की समीक्षा की और प्रस्तावित फायर एक्ट को लागू करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव के निर्देश पर, नगरीय प्रशासन विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव मनीष सिंह ने फाइल उस समय मंत्री रहे भूपेंद्र सिंह को भेजी। प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद इसे एकबार फिर विधि विभाग को भेजा गया। साल 2023: विधि विभाग की मंजूरी मगर ठंडे बस्ते में ड्रॉफ्ट
17 अप्रैल 2023 को विधि विभाग ने फायर एक्ट को मोडिफाइड कर प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके बाद: इस पर कोई आगे की कार्रवाई नहीं हुई और इसे मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिवों की समिति के सामने प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बजाय, इसमें फिर से संशोधन की प्रक्रिया शुरू हो गई और यह लंबित हो गया। वर्तमान स्थिति (फायर एक्ट 2025): वित्त विभाग के पास अटका
हाल ही में नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिवों की कमेटी के सामने “फायर एक्ट 2025” का एक नया संशोधित ड्राफ्ट प्रस्तुत किया। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इस कमेटी को यह नहीं बताया गया कि “फायर एक्ट 2023” को विधि विभाग पहले ही मंजूरी दे चुका है। नगरीय प्रशासन विभाग के दो दो पूर्व मंत्री इसे हरी झंडी दे चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में सुझाव आया कि एक अलग फायर एक्ट की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह काम नगरीय निकायों का है। हालांकि, इस बैठक में यह तय हुआ है कि केंद्र के मॉडल ड्राफ्ट के प्रावधानों में संशोधन कर इसे एक बार फिर प्रस्तुत किया जाए। फिलहाल वित्त विभाग इस ड्राफ्ट का परीक्षण कर रहा है। मंत्री ने विधानसभा में कहा- 3 महीन में नया ड्राफ्ट तैयार होगा
मप्र में फायर एक्ट कब लागू होगा इसे लेकर विधानसभा में बहस भी हो चुकी है। जबलपुर उत्तर सीट से बीजेपी विधायक अभिलाष पांडे ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए सरकार से जवाब मांगा था कि आग लगने की बढ़ती घटनाओं के बीच आखिर कब फायर सेफ्टी एक्ट लागू होगा। इस एक्ट के न होने से फायर सेफ्टी नॉर्म्स का पालन करवाना बड़ा कठिन हो गया है। इस ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि राज्य सरकार मप्र नगर पालिका अधिनियम 1956 और 1961 के तहत जरूरी कदम उठाती है। साल 2022 से ई नगर पालिका पोर्टल के जरिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट ऑनलाइन दिए जाते हैं। केंद्र सरकार ने मॉडल फायर एक्ट का मसौदा दिया है इसके मुताबिक ही मप्र का फायर एक्ट तैयार किया जा रहा है। अगले दो से तीन महीने में एक्ट बनकर तैयार हो जाएगा। विजयवर्गीय ने ये भी कहा कि सरकार की कोशिश है कि आग लगने की सूचना के दस मिनट के भीतर गाड़ी पहुंच जाए इसके लिए शहरों में फायर स्टेशन बनाने पड़ेंगे। इसकी जानकारी नगरपालिका-निगम से मांगी है। अब जानिए फायर एक्ट लागू न होने की असली वजह फायर एक्ट का 2023 का मसौदा तैयार है। इसे विधि विभाग से मंजूरी मिल चुकी है, इसके बाद भी इसमें संशोधन कर फायर एक्ट 2025 का नया मसौदा तैयार किया गया है। इस पर भी विचार चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि नगरीय आवास एवं विकास विभाग के अफसर ही नहीं चाहते कि मप्र में नया फायर एक्ट लागू हो। दरअसल, केंद्र ने जो मॉडल एक्ट का मसौदा दिया है उसमें एक नया डायरेक्ट्रेट( संचालनालय) बनाने का प्रावधान है। इसके बनने के बाद नगरीय आवास एवं विकास विभाग की अहमियत कम हो जाएगी। दूसरा फायर सर्विस नगरपालिका और नगर निगम के अधीन नहीं होंगी। बड़े-बड़े राजनीतिक और धार्मिक आयोजनों के लिए फायर एनओसी लेना पड़ेगी। 6 पॉइंट्स में जानिए फायर एक्ट 2023 के प्रावधान 1.फायर सेफ्टी नहीं तो लग सकता है 10 हजार तक का जुर्माना
अब 9 मीटर ऊंचाई वाले भवनों को भी फायर एनओसी लेनी होगी अब तक 15 मीटर ऊंचाई वाले भवनों के लिए ही यह जरूरी है। शैक्षणिक संस्थान, संस्थागत, सभा, व्यवसायिक- व्यापारिक, औद्योगिक गोदाम के लिए 500 मीटर से अधिक के क्षेत्र में फायर एनओसी अनिवार्य रहेगी। 2.सार्वजनिक आयोजन के लिए भी फायर एनओसी अनिवार्य
इसके लिए पंडाल लगाने वाले को एक घोषणा पत्र देना होगा, जिसमें आग से बचने के इंतजाम करने की जानकारी होगी। यदि जांच में जानकारी गलत पाई जाती है तो उसे सील करने का अधिकार होगा। इसके लिए 10 हजार रुपए का जुर्माना और 3 महीने कारावास की सजा होगी। 3.हर साल लेना होगा यूटिलिटी सर्टिफिकेट
ड्राफ्ट के मुताबिक, भवन निर्माण के दौरान फायर सेफ्टी सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। भवनों में ऑटोमैटिक स्प्रिंकल सिस्टम, फायर अलार्म और फायर सेफ्टी उपकरण लगाने होंगे। यदि ऐसा नहीं होगा तो निदेशक यूटिलिटी सर्टिफिकेट जारी नहीं करेगा। यह एक साल के लिए जारी किया जाएगा। 4.नए फायर स्टेशन बनेंगे, कर्मचारी मर्ज होंगे
शहरों में फायर स्टेशन बनाए जाएंगे। हर स्टेशन के लिए एक फायर आफिसर की नियुक्ति होगी, जो इसका प्रभारी होगा। अग्निशमन सेवा का नया कैडर बनेगा। प्रदेश स्तर का फायर डायरेक्टोरेट बनेगा, जिसमें पुलिस और नगर निगम- पालिका के कर्मचारी मर्ज हो जाएंगे। हर निकाय में फायर सेफ्टी अधिकारी नियुक्त होंगे। 5.कारखानों, बहुमंजिला इमारतों में फायर सेफ्टी अफसर जरूरी
इस अफसर के पास फायर डिप्लोमा या फायर इंजीनियरिंग की डिग्री होना जरूरी होगा। ये फायर स्टेशन के प्रभारी को समय-समय पर रिपोर्ट भेजेगा। यह पद खाली नही रखा जा सकेगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो फायर स्टेशन प्रभारी को कार्यवाही करने का अधिकार होगा। 6. तीन घंटे की सूचना पर होगी जांच
फायर स्टेशन प्रभारी 3 घंटे की सूचना पर सुबह से शाम होने तक किसी भी भवन या प्रतिष्ठान में फायर उपकरणों की जांच कर सकेगा। इसके लिए शासन या प्रशासन से किसी अनुमति की जरूरत नहीं होगी। भवन मालिक ऐसे निरीक्षण में रुकावट पैदा नहीं कर सकेंगे। एक्शन लेने का अधिकार भी होगा। ये खबर भी पढ़ें… 12 बड़े अस्पतालों में फायर सेफ्टी के बेसिक इंतजाम तक नहीं इंदौर के 12 बड़े अस्पतालों में भर्ती मरीजों की जान खतरे में है, क्योंकि इनके पास आग बुझाने के बेसिक इंतजाम तक नहीं हैं। इनमें सरकारी पीसी सेठी अस्पताल भी शामिल है। इसका खुलासा एक आरटीआई से हुआ है। पढ़ें पूरी खबर…

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