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एक देश-एक चुनाव से मतदाता अधिकार प्रभावित नहीं होंगे:JPC की मीटिंग में पहुंचे पूर्व CJI बीआर गवई; बोले- संशोधन संविधान के दायरे में

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व CJI जस्टिस बीआर गवई ने गुरुवार को वन नेशन, वन इलेक्शन (ONOE) पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक देश एक चुनाव से मतदाता अधिकार प्रभावित नहीं होंगे और संघीय ढांचे पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। पूर्व CJI ने यह बात वन नेशन, वन इलेक्शन पर हुई जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) की एक मीटिंग कही। उन्होंने तर्क दिया कि संसद के पास चुनावों को एक साथ करने के लिए ऐसा संशोधन लागू करने की शक्ति है, जैसा कि संविधान द्वारा अनिवार्य है। एक देश एक चुनाव को लेकर JPC अंतिम निष्कर्ष के करीब है। कई मीडिया रिपोर्ट्स ने दावा किया है कि वन नेशन, वन इलेक्शन पर JPC की रिपोर्ट मार्च के अंत तक आ सकती है। पूर्व CJI बोले- सरकार पर बहुमत नहीं, तो उसे पद छोड़ना होगा सूत्रों का कहना है कि बैठक में यह मुद्दा उठा कि संविधान नागरिकों को 5 साल के पूरे कार्यकाल के लिए सरकार चुनने का अधिकार देता है। यदि सरकार बीच में गिर जाए और शेष अवधि के लिए चुनाव न हो तो क्या यह मतदाता अधिकारों को प्रभावित करेगा। माना जा रहा है कि गवई ने समिति के सामने कहा कि संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पूरी तरह संवैधानिक दायरे में है। सूत्रों का कहना है कि एक सदस्य ने सरकार की जवाबदेही को लेकर प्रश्न उठाया। इस पर गवई ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव जैसे संवैधानिक साधन यथावत बने रहेंगे। यदि किसी सरकार के पास बहुमत नहीं रहेगा तो उसे पद छोड़ना होगा। इससे पहले 4 सीजेआई ने ये कहा… •जस्टिस यूयू ललित: प्रस्ताव मूल ढांचे के खिलाफ नहीं, पर आयोग की शक्तियों पर सावधानी जरूरी। • जस्टिस रंजन गोगोई: विधेयक संवैधानिक रूप से मजबूत, लेकिन कुछ प्रावधानों में स्पष्टता चाहिए। •जस्टिस जेएस खेहर: मूल संरचना सुरक्षित, पर आयोग को अतिरिक्त अधिकार देने पर राष्ट्रीय बहस हो। •जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़: एक साथ चुनाव संभव, लेकिन आयोग की व्यापक शक्तियों की स्पष्ट कानूनी सीमा तय हो। ——————- ये खबर भी पढ़ें… CJI गवई बोले-40 साल की यात्रा से बेहद संतुष्ट हूं:कहा- न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना है, 23 नवंबर को रिटायरमेंट CJI गवई ने अपने अंतिम कार्य दिवस पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता को संविधान की मूल संरचना बताते हुए कहा कि 2021 के ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स कानून की प्रमुख धाराओं को रद्द करने का फैसला इसी सिद्धांत पर आधारित था। पूरी खबर पढे़ं…

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