बालाघाट पुलिस ने जिले में सक्रिय फर्जी सिम कार्ड के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसपी आदित्य मिश्रा ने बुधवार को बताया कि आरोपियों ने केवल 5 अद्वितीय चेहरों का उपयोग कर विभिन्न कंपनियों के 450 सिम कार्ड अवैध रूप से जारी किए थे। इस गिरोह के तार भोपाल, मंडला, डिंडौरी और उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए हैं। डीओटी के एआई टूल ‘ऑपरेशन फेस’ से हुआ खुलासा यह पूरा मामला भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) के एआई आधारित फेस एनालिसिस टूल के माध्यम से सामने आया है। विभाग ने संदिग्ध डेटा स्टेट पुलिस के साइबर सेल से साझा किया, जिसके बाद ‘ऑपरेशन फेस’ के तहत बालाघाट पुलिस को 450 संदिग्ध सिम कार्ड की जानकारी दी गई। जांच में सामने आया कि अलग-अलग नाम और पतों पर जारी इन सिम कार्ड्स में केवल 5 लोगों के फोटो का बार-बार इस्तेमाल किया गया था। मोबाइल दुकान और कियोस्क संचालक गिरफ्तार पुलिस ने इस मामले में बैहर निवासी मोबाइल दुकान संचालक पति-पत्नी महेंद्र उर्फ संतोष पटले और प्रियंका पटले को गिरफ्तार किया है। इनके साथ ही परसवाड़ा में कियोस्क संचालित करने वाला खुमेश गौतम भी पकड़ा गया है, जो भोपाल की एक मोबाइल कंपनी के लिए सिम बेचने का काम करता था। इन तीनों आरोपियों को 31 मार्च को गिरफ्तार किया गया था, जिनसे फिलहाल पुलिस पूछताछ कर रही है। दस्तावेजों का दुरुपयोग कर ऊंचे दामों पर बेची सिम आरोपी 2019 से 2022 के बीच सिम एक्टिवेशन और पोर्टिंग के दौरान ग्राहकों के दस्तावेजों का उनकी जानकारी के बिना उपयोग करते थे। केवाईसी प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा कर अपनी लाइव फोटो अपलोड कर सिम सक्रिय कर देते थे और बाद में इन्हें ऊंचे दामों पर भोपाल और यूपी में बेच देते थे। पुलिस विवेचना के चलते अभी शेष आरोपियों के नाम उजागर नहीं किए गए हैं। 19 लोगों पर केस, जांच के लिए टीम भोपाल रवाना एसपी मिश्रा के अनुसार, इस मामले में कुल तीन अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर 19 लोगों को नामजद किया गया है। भोपाल से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस की एक टीम जांच के लिए राजधानी रवाना हो गई है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने पहचान पत्र अनजान व्यक्तियों को न दें और यदि फोटोकॉपी देना अनिवार्य हो, तो उस पर उद्देश्य लिखकर उसे ‘क्रॉस’ जरूर करें। यह है डीओटी का एआई टूल ‘ऑपरेशन फेस’ दूरसंचार विभाग (DoT) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित एक चेहरे की पहचान करने वाला उपकरण विकसित किया है, जिसके बारे में उसका दावा है कि यह दूरसंचार ऑपरेटरों के ग्राहक डेटाबेस पर जांच करने में सक्षम है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसमें एक ही व्यक्ति से जुड़े कई कनेक्शन हैं। दूरसंचार विभाग का दावा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फेशियल रिकग्निशन पावर्ड सॉल्यूशन फॉर टेलीकॉम सिम सब्सक्राइबर वेरिफिकेशन (ASTR) नामक यह टूल संभावित फर्जी मोबाइल कनेक्शनों का पता लगाकर और उन्हें ब्लॉक करके साइबर धोखाधड़ी को कम कर सकता है।
