इंदौर के 12 बड़े अस्पताल बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। इनमें से 11 का खुलासा आरटीआई से हुआ है। चौंकाने वाला नाम सरकारी अस्पताल पीसी सेठी हॉस्पिटल का है। इस अस्पताल के पास भी एनओसी नहीं है। जबकि बुधवार को ही एक भीषण अग्निकांड में शहर के 8 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो चुकी है। हाईकोर्ट अधिवक्ता चर्चित शास्त्री ने 100 बेड से ज्यादा क्षमता वाले अस्पतालों की फायर एनओसी की जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में पता चला है कि कुछ अस्पतालों ने तो फायर सेफ्टी सिस्टम ही पूरा नहीं किया है, जबकि कुछ ने सालों से एनओसी का नवीनीकरण नहीं कराया है। महापौर बोले- स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी आरटीआई में हुए खुलासे को लेकर मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और सीएमएचओ पर डाल दी। उनका कहना है कि अस्पतालों की निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। वहीं, सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी का कहना है कि पीसी सेठी अस्पताल को तब तक फायर एनओसी नहीं मिलेगी, जब तक वहां का अतिक्रमण नहीं हटाया जाता। सरकार अभी तक अतिक्रमण हटाने का मामला सुलझा नहीं पाई है। अतिक्रमण के कारण पीसी सेठी में वर्ष 2018 से फायर एनओसी की समस्या बनी हुई है। विभागीय स्तर पर इस संबंध में सभी जगह पत्राचार किया जा चुका है। वहीं, अन्य 11 अस्पतालों पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर-CMHO को भी दे चुका जानकारी आरटीआई लगाने वाले एडवोकेट चर्चित शास्त्री का कहना है कि जिन अस्पतालों में सैकड़ों मरीज भर्ती रहते हैं, वहां फायर सेफ्टी के बेसिक इंतजाम तक नहीं हैं। यानी अगर आग लगती है, तो मरीजों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं होगा। चर्चित ने कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर कलेक्टर और सीएमएचओ को जानकारी देते हुए शिकायत भी की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अस्पताल और कमर्शियल बिल्डिंग असुरक्षित मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता अमित चौरसिया ने बताया कि इंदौर कलेक्टर द्वारा अगस्त 2024 में कमर्शियल बिल्डिंग संचालकों को एक महीने के भीतर फायर सेफ्टी के सभी इंतजाम पूरे करने के सख्त निर्देश दिए गए थे। स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि नियमों का पालन नहीं करने पर बिल्डिंग्स को सील किया जाएगा। इसके बावजूद आज तक न तो पूरी तरह जांच हुई और न ही नियमों का पालन सुनिश्चित कराया गया। हाल ही में सामने आई आरटीआई जानकारी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने दिए थे निर्देश दो साल पहले इंदौर में पदस्थ तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने सीएमएचओ और डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज को प्राइवेट नर्सिंग होम और अस्पतालों में सुरक्षा की पुख्ता निगरानी के निर्देश दिए थे। निर्देश के मुताबिक, नर्सिंग होम और अस्पतालों के पास नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र और बिजली सुरक्षा प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। सभी नर्सिंग होम, अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों को ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। उस समय सभी नर्सिंग होम और अस्पतालों को हर हाल में यह व्यवस्था पूरी करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन सिंह के इंदौर से जाते ही पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया। MP के अस्पतालों में लगी आग की बड़ी घटनाएं ये खबरें भी पढ़ें… इंदौर में EV ब्लास्ट, एक साथ 7 चिताएं जलीं इंदौर में इलेक्ट्रिक कार टाटा पंच में चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई, जिसने तीन मंजिला मकान को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में रबर कारोबारी मनोज पुगलिया, उनकी गर्भवती बहू सिमरन समेत 8 लोगों की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें… कारोबारी के बेटे का दावा- EV से नहीं लगी आग इंदौर में हुए EV हादसे ने एक खुशहाल परिवार को कुछ ही मिनटों में तबाह कर दिया। हादसे से बचकर निकले कारोबारी मनोज पुगलिया के बेटे सौमिल ने कहा- जब इलेक्ट्रिक कार में चार्जर ही कनेक्ट नहीं था, तो शॉर्ट सर्किट कैसे हो सकता है? हादसे के वीडियो में दिखाई दे रहा है कि इलेक्ट्रिक पोल के ऊपर शॉर्ट सर्किट से चिंगारियां उठ रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…
