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अमेरिका-ईरान युद्ध:कमर्शियल एलपीजी में आपातकाल! जीरो सिलेंडर के हालात 4 हजार से ज्यादा रेस्टोरेंट और खानपान की दुकानों पर संकट

खाड़ी देशों में भड़की युद्ध की आग से पैदा हुए एलपीजी संकट के बाद सरकार ने 9 मार्च को कमर्शियल एलपीजी सप्लाय पर रोक लगा थी। इसका असर रेस्टोरेंट, होटल्स, कैंटीन, मैस व खान-पान की दुकानों पर पड़ने लगा है। 15 से 20 प्रतिशत तो बंद हो गए या लंच-डिनर बंद कर दिया है। स्टॉक व वैकल्पिक संसाधनों से जैसे-तैसे 10-12 दिन निकाल दिए, अब सप्लाय शुरू नहीं हुई तो धीरे-धीरे सभी पर असर होगा। इसका असर फूड इकोनॉमी व रोजगार पर तो होगा ही, रोजाना 1.5 से 2 लाख लोगों के लिए भोजन, नाश्ते का संकट खड़ा हो जाएगा। असर अब सराफा चौपाटी, छप्पन दुकान जैसे खान-पान स्थल भी दिखने लगा है। दूध, नमकीन व मिठाइयों का कारोबार भी प्रभावित होने लगा है। छप्पन दुकान पर फास्ट फूड काउंटर चल रहे हैं। गर्म खाना सर्व करने वाले काउंटर आइटम सीमित होने से खाली होने लगे हैं। छप्पन दुकान एसोसिएशन के गुंजन शर्मा का कहना है, प्रशासन के सहयोग से पीएनजी कनेक्शन मिल रहे हैं। अगले एक सप्ताह में सभी 20 फूड काउंटर पर यह उपलब्ध होंगे। इससे परेशानी दूर हो जाएगी। वर्तमान में इंडक्शन व अन्य विकल्प से काम चला रहे हैं। आगामी दिनों में भी सप्लाय सुचारु नहीं हुई तो कचौरी, समोसे, चाय, पोहे, जलेबी, रोजाना खाने के आयटम्स की दुकानें भी प्रभावित होने लगेंगी। 20 फीसदी संस्थानों ने मैन्यू बदले, इंडक्शन पर देर लगती है नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के अभिषेक बाहेती व सचिन अग्रवाल ने बताया, एलपीजी आधारित उद्योग तो लगभग बंद हो गए हैं। होटल-रेस्टोरेंट और खानपान की दुकानें स्टॉक से काम चला रहे थे, लेकिन उनके पास भी सिलेंडर खाली होने से जीरो सिलेंडर की स्थिति बन गई है। 20 फीसदी संस्थानों ने तो अपने मैन्यू बदल दिए हैं। कहीं दिन में लंच दिया जा रहा है तो कहीं रात में डिनर की व्यवस्था है। होटल, रेस्टोरेंट के लिए एलपीजी जरूरी है। कई वस्तुएं ऐसी होती हैं, जिनको तत्काल कस्टमर को गर्म करके देना होता है। इंडक्शन पर यह संभव नहीं होता, इसमें 20 से 30 मिनट का समय लगता है। इसका उपयोग भी सीमित है। जीरो सिलेंडर की स्थिति में रेस्टोरेंट, होटल्स, कैंटीन चलाना मुश्किल हो जाएगा। अगले एक सप्ताह में बंद होने का आंकड़ा 50 फीसदी से ज्यादा हो सकता है। 3200 की जगह 700 सिलेंडर तक सिमटी सप्लाय शहर में 3200 सिलेंडर की जगह मात्र 600 से 700 कमर्शियल सिलेंडर ही सप्लाय हो रहे हैं। पीएनजी पर चलने वाले रेस्टोरेंट, होटल चालू हैं, लेकिन यहां भी दाम बढ़ने और सप्लाय में परेशानी आ रही है। होटल एसोसिएशन के सूमित सूरी का कहना है, स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इसका असर आने वाले दिनों में गर्मी की छुट्टियों में पयर्टन इकोनॉमी पर होगा। सराफा में 4-5 दुकानें बंद, कैफे संकट में सराफा चौपाटी एसोसिएशन के राम गुप्ता का कहना है, यहां पर एलपीजी सिलेंडर का कम ही उपयोग होता है। पाव भाजी, छोले टिकिया, जलेबी जैसे आइटम बनते हैं। जिनके पास स्टॉक है, वो दुकान लगा रहे हैं। 4-5 दुकानें बंद भी हुई हैं। स्कीम 140, भंवरकुआं, विजय नगर, स्कीम 54, एलआईजी, अन्नपूर्णा आदि क्षेत्रों के कैफे संचालकों का कहना है, एलपीजी सिलेंडर जरूरी है। इसके बिना कई आइटम मैन्यू से हटाना पड़े, क्योंकि इंडक्शन पर तत्काल बना कर देना आसान नहीं है। कोटा बढ़ेगा तो उपलब्ध कराएंगे
कमर्शियल सिलेंडर को लेकर केंद्र से कोटा बढ़ाने के निर्देश मिलेंगे वैसे ही उपलब्धता कराएंगे। इस सप्ताह सुधार होगा। – एमएल मारू, खाद्य आपूर्ति नियंत्रक

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