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अफसरों की संपत्ति अब भी ‘सीक्रेट:मप्र कैडर के 810 आईएएस-आईपीएस-आईएफएस की घोषित संपत्ति के विश्लेषण से खुलासा…बड़ी संख्या में अधूरी जानकारी

संपत्ति सीक्रेट : 58% अफसरों ने या तो निल बताई या मूल्य अज्ञात मध्यप्रदेश कैडर के अखिल भारतीय सेवा के अफसरों की संपत्ति अब भी ‘सीक्रेट’ है। एक जनवरी 2026 तक दाखिल अचल संपत्ति रिटर्न में 810 अफसरों (आईएएस, आईपीएस और आईएफएस) ने जो जानकारी दी है, उसमें से करीब 58% ने या तो अपनी संपत्ति निल बताई है या उसका बाजार मूल्य स्पष्ट नहीं किया है। यानी हर 10 में से 6 अफसरों ने ऐसा किया है। 400 से अधिक अधिकारी ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी अचल संपत्ति ‘निल’ घोषित की है। यह प्रवृत्ति खासतौर पर नई बैचों में दिखाई देती है, जहां अधिकारी अभी सेवा के शुरुआती चरण में हैं और निजी संपत्ति का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। जैसे-जैसे सेवा अवधि बढ़ती है, ‘निल’ का स्थान एक नई प्रवृत्ति ले लेती है। कई वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी संपत्तियों का विवरण तो दिया है, लेकिन उनके सामने ‘मूल्यांकन नहीं’, ‘ज्ञात नहीं’ या ‘निर्धारित नहीं’ जैसे शब्द लिखे हैं। ऐसे 50 से अधिक अफसर हैं। इनमें से कई अफसर तो ऐसे हैं, जिनके पास 15 से अधिक संपत्तियां हैं, लेकिन उन्होंने इसका बाजार मूल्य नहीं बताया है। मूल्य नहीं बताने के दो बड़े कारण 1. पुश्तैनी और एचयूएफ संपत्ति: कई संपत्तियां अभी भी ​हिंदू संयुक्त परिवार (एचयूएफ) के नाम पर हैं और उनका कानूनी बंटवारा नहीं हुआ है। ऐसे में अधिकारी अपने हिस्से का सटीक मूल्य बताने से बचते हैं।
2. मूल्यांकन में ‘तकनीकी छूट’:अफसरों को छूट रहती है कि यदि सटीक मूल्यांकन संभव न हो, तो वे ‘अनुमानित मूल्य’ बता सकते हैं। कई अधिकारी ‘अज्ञात’ या ‘मूल्यांकन नहीं’ लिख देते हैं। अमीरी में भी सीनियॉरिटी : IAS सबसे आगे, इसके बाद आईपीएस सीनियर ऑफिसर सबसे अमीर, जूनियर्स के पास ‘कुछ नहीं’ ट्रेंड बताता है कि जैसे-जैसे अफसर की नौकरी पुरानी होती है, उसकी संपत्ति बढ़ती जाती है। निवेश : IAS का दांव हाई वैल्यू प्रॉपर्टी, IPS-IFS का जमीन पर अफसरों की संपत्ति का असली फर्क सिर्फ रकम में नहीं, बल्कि इस बात में छिपा है कि पैसा आखिर लगाया कहां जा रहा है? सभी अफसरों की संपत्ति रिटर्न का विश्लेषण बताता है कि तीनों सेवाओं ने निवेश के लिए अलग-अलग रास्ते चुने हैं और वही उनकी आर्थिक प्रोफाइल तय कर रहा है। डेटा यह भी दिखाता है कि अफसरों के निवेश के कुछ तय केंद्र बन चुके हैं। इनमें भोपाल (अरेरा कॉलोनी, शाहपुरा, बावड़िया कलां), इंदौर (विजय नगर, निपानिया) और दिल्ली-एनसीआर (नोएडा, गुरुग्राम) प्रमुख हैं। आईएएस : कमर्शियल स्पेस व प्रीमियम फ्लैट्स आईएएस का झुकाव बड़े शहरों और हाई-वैल्यू प्रॉपर्टी की ओर है। भोपाल, इंदौर के प्राइम एरिया और दिल्ली-एनसीआर जैसे बाजार इनके पसंदीदा निवेश केंद्र हैं। कमर्शियल ऑफिस स्पेस, प्राइम लोकेशन के फ्लैट, हाई-एंड अपार्टमेंट्स में निवेश ज्यादा है, जहां कीमत तेजी से बढ़ती है। किराए से नियमित आय भी मिलती है। आईपीएस: भविष्य के लिए जमीन और बड़े प्लॉट पसंद आईपीएस अधिकारियों का निवेश पैटर्न पूरी तरह कृषि भूमि और प्लॉट पर आधारित है। इनमें से ज्यादातर अफसरों सबसे बड़ा एसेट पुश्तैनी और कृषि भूमि है, जो कई मामलों में बड़े रकबे में फैली होती है। निवेश का उद्देश्य सिर्फ मौजूदा कीमत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा, भविष्य में हाईवैल्यू दिखाई देता है। आईएफएस : खेत, प्लॉट व कार्यक्षेत्र से जुड़ा निवेश आईएफएस का निवेश जमीन से जुड़ा दिखता है। इनके पोर्टफोलियो में बड़े कृषि भूखंड, छोटे ग्रामीण प्लॉट और कई बार संयुक्त संपत्ति साथ-साथ मिलती है। दरअसल, जंगल और ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले इन अधिकारियों का निवेश भी उसी भूगोल के आसपास घूमता है।

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